मरोड़ · प्रारंभिक
भरद्वाज की मरोड़
Bharadvajasana·भरद्वाजासन·bharadvājāsana
अन्य नाम: ऋषि भरद्वाज की मुद्रा
भरद्वाजासन शुरुआती-स्तर की बैठी मरोड़ है — अर्ध मत्स्येन्द्रासन या मरीच्यासन से कूल्हों और घुटनों पर आसान। उन लोगों के लिए उपयोगी जिन्हें पालथी वाली मरोड़ें तीव्र लगती हैं। असममित पैर-स्थिति आश्चर्य है — अधिकांश ने इस ज्यामिति से पहले कभी मरोड़ नहीं की।
लाभ
- सूची में सबसे कोमल बैठी मरोड़ — लगभग सभी के लिए सुलभ
- असममित पैर-स्थिति शरीर को असंतुलन के बावजूद ऊर्ध्वता पाना सिखाती है
- कोमल पेट-दबाव से पाचन को उत्तेजित करती है
- गहरी मरोड़ों और आगे झुकानों के बीच संक्रमण मुद्रा के रूप में उपयोगी
भरद्वाज की मरोड़ कैसे करें
- मुड़े कंबल पर दोनों पैर सामने फैलाकर बैठें।
- दोनों घुटने मोड़ें और पैरों को बाईं ओर झुलाएँ। पैरों को इस तरह जमाएँ कि दाहिना टखना बाएँ मेहराब पर टिके।
- दोनों बैठने की हड्डियों पर समान रूप से बैठें — कंबल समायोजित करें ताकि दाहिना कूल्हा जड़ सके।
- साँस लें और रीढ़ को लंबा करें।
- साँस छोड़ें और धड़ को दाईं ओर, पैरों से दूर घुमाएँ।
- दाहिना हाथ अपने पीछे ज़मीन पर रखें। बायाँ हाथ दाहिने घुटने या जाँघ पर लाएँ।
- हर साँस छोड़ना एक स्पर्श गहरा घुमाता है। पक्ष बदलें।
सुझाई गई अवधि: 45 सेकंड · श्वास: Paced
भरद्वाज की मरोड़ आपके दोषों को कैसे प्रभावित करता है
आयुर्वेद में वही आसन आपकी प्रकृति के अनुसार अलग असर करता है। यही वह दृष्टिकोण है जिससे ऐप आपकी प्रैक्टिस क्रमबद्ध करता है।
| दोष | प्रभाव | टिप्पणियाँ |
|---|---|---|
| Vata | संतुलनकारी | अच्छा मेल — इस दोष को शांत करने में मदद करता है |
| Pitta | संतुलनकारी | अच्छा मेल — इस दोष को शांत करने में मदद करता है |
| Kapha | संतुलनकारी | अच्छा मेल — इस दोष को शांत करने में मदद करता है |
इसे मैट से परे भी संतुलित करें
आसन और आहार एक ही संतुलन के दो पहलू हैं। उसी दोष को थाली में शांत करें:
इस आसन को किसे टालना या बदलना चाहिए
- गर्भवती महिलाओं को केवल खुली विविधता करनी चाहिए — पेट को न दबाएँ
- स्लिप डिस्क या गंभीर निचली पीठ की चोट में अभ्यास न करें
- हाल की पेट, कूल्हे या पीठ की सर्जरी के बाद इससे बचें
- गंभीर घुटने की चोट में छोड़ दें — पैर-मोड़ असममित है
यदि आप गर्भवती हैं, चोटिल हैं, या किसी स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं, तो अभ्यास से पहले किसी योग्य शिक्षक या चिकित्सक से परामर्श करें।
बदलाव
- यदि कोई कूल्हा ज़मीन से उठे तो ऊँचे मुड़े कंबल पर बैठें
- यदि घुटने तक पहुँचना कंधे को तनाव दे तो दोनों हाथ सहारे के लिए ज़मीन पर रखें
- घुमाव की गहराई घटाएँ — आधी मरोड़ ठीक है
- कुर्सी में अभ्यास करें: एक पैर पार करें, कुर्सी की पीठ की ओर घुमाएँ
पारंपरिक स्रोत: Modern hatha — आधुनिक हठ आसन, वैदिक ऋषि भरद्वाज के नाम पर। हठ योग प्रदीपिका अध्याय 1 में सूचीबद्ध नहीं।