पश्च-मोड़ · प्रारंभिक
टिड्डी मुद्रा
Salabhasana·शलभासन·śalabhāsana
अन्य नाम: टिड्डी
शलभासन ताकत-निर्माण वाला पीठ-झुकाव है। जहाँ कोबरा रीढ़ के लचीलेपन पर ज़ोर देता है, वहाँ शलभासन उन मांसपेशियों पर काम करता है जो रीढ़ को विस्तार में थामती हैं — अधिकांश डेस्क-संबंधी पीठ दर्द के पीछे की पुरानी कमज़ोरी। प्रत्येक 30 सेकंड के तीन दौर, बीच में एक साँस के विश्राम के साथ, एक लंबे होल्ड से अधिक उपयोगी हैं।
लाभ
- पूरी पिछली शृंखला को मज़बूत करता है — निचली पीठ, नितंब, हैमस्ट्रिंग, ऊपरी पीठ
- आगे-सिर मुद्रा और गोल कंधों का प्रतिकार करता है
- लंबी पीठ-झुकानों के लिए मुद्रा-सहनशक्ति बनाता है
- पेट-के-बल संपीड़न से पेट के अंगों को उत्तेजित करता है
टिड्डी मुद्रा कैसे करें
- किसी नरम सतह पर पेट के बल लेट जाएँ। माथा चटाई पर टिका हुआ।
- भुजाओं को शरीर के साथ फैलाएँ, हथेलियाँ नीचे या ऊपर।
- पैरों के ऊपरी भाग को ज़मीन में दबाएँ, पैर कूल्हे की चौड़ाई पर।
- साँस लें और छाती, भुजाएँ और पैर एक साथ ज़मीन से उठाएँ।
- सिर के शीर्ष से आगे और पंजों से पीछे की ओर खिंचें।
- गर्दन का पिछला भाग लंबा रखें — एक फुट आगे ज़मीन पर देखें।
- साँस छोड़ें और सब कुछ नीचे करें। दौरों के बीच एक गाल चटाई पर रखकर विश्राम करें।
सुझाई गई अवधि: 30 सेकंड · श्वास: Paced
टिड्डी मुद्रा आपके दोषों को कैसे प्रभावित करता है
आयुर्वेद में वही आसन आपकी प्रकृति के अनुसार अलग असर करता है। यही वह दृष्टिकोण है जिससे ऐप आपकी प्रैक्टिस क्रमबद्ध करता है।
| दोष | प्रभाव | टिप्पणियाँ |
|---|---|---|
| Vata | तटस्थ | मोटे तौर पर तटस्थ |
| Pitta | सावधानी | इस दोष को बढ़ा सकता है — कम अभ्यास करें |
| Kapha | संतुलनकारी | अच्छा मेल — इस दोष को शांत करने में मदद करता है |
इसे मैट से परे भी संतुलित करें
आसन और आहार एक ही संतुलन के दो पहलू हैं। उसी दोष को थाली में शांत करें:
इस आसन को किसे टालना या बदलना चाहिए
- गर्भवती महिलाओं को अभ्यास नहीं करना चाहिए — पेट-के-बल स्थिति असुरक्षित है
- स्लिप डिस्क, गंभीर निचली पीठ की चोट या हाल की पेट की सर्जरी में अभ्यास न करें
- उच्च या निम्न रक्तचाप में छोड़ दें
- गर्दन की चोट में इससे बचें — दृष्टि ज़मीन पर रखें
- खाने के बाद छोड़ दें — 3-4 घंटे रुकें
यदि आप गर्भवती हैं, चोटिल हैं, या किसी स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं, तो अभ्यास से पहले किसी योग्य शिक्षक या चिकित्सक से परामर्श करें।
बदलाव
- अर्ध शलभासन — एक बार में एक पैर उठाएँ
- केवल छाती या केवल पैर उठाएँ, दोनों नहीं
- निचली पीठ के सहारे के लिए हाथों को कूल्हों के नीचे, हथेलियाँ नीचे रखें
- कूल्हे की हड्डियों के नीचे मुड़ा कंबल रखकर अभ्यास करें
पारंपरिक स्रोत: Modern hatha — आधुनिक हठ आसन। "शलभ" = टिड्डी। हठ योग प्रदीपिका अध्याय 1 में सूचीबद्ध नहीं।