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सूर्य नमस्कार A

Surya Namaskar A·सूर्य नमस्कार A·sūrya namaskāra

अन्य नाम: सूर्य नमस्कार, सूर्य नमस्कार

सूर्य नमस्कार A (Surya Namaskar A)

सूर्य नमस्कार A किसी भी विन्यास अभ्यास की प्रामाणिक प्रारंभिक श्रृंखला है — 3-10 दौर गर्मी बनाते हैं, रीढ़ खोलते हैं, और साँस-नेतृत्व प्रवाह का प्रशिक्षण देते हैं जिस पर बाकी सब निर्भर है। योग में नए लोगों के लिए यह एक श्रृंखला आधा अभ्यास है — अधिकांश अन्य आसन तब सुलभ हो जाते हैं जब शरीर इस प्रवाह को जान लेता है।

लाभ

  • आधुनिक योग में सबसे पूर्ण एकल श्रृंखला — हर प्रमुख मांसपेशी समूह, गति का हर तल
  • हृदय-संवहनी और ऊष्मा देने वाली — शेष अभ्यास के लिए गर्मी बनाती है
  • साँस-गति समन्वय का प्रशिक्षण देती है — विन्यास की नींव
  • पारंपरिक संदर्भ में सूर्य की ऊर्जा का सम्मान करती है

सूर्य नमस्कार A कैसे करें

  1. हाथों को हृदय पर प्रणाम में रखकर चटाई के अगले सिरे पर खड़े हों (ताड़ासन)।
  2. साँस लें: भुजाओं को बाहर और सिर के ऊपर ले जाएँ, हल्का पीठ-झुकाव (ऊर्ध्व हस्तासन)।
  3. साँस छोड़ें: पैरों के ऊपर आगे झुकें, हाथ ज़मीन पर (उत्तानासन)।
  4. साँस लें: छाती को आधा उठाएँ, उँगलियों के सिरे पिंडलियों पर, लंबी सपाट पीठ (अर्ध उत्तानासन)।
  5. साँस छोड़ें: तख़्ती में पीछे कदम या कूद, कोहनियाँ पास रखते हुए आधा नीचे (चतुरंग)।
  6. साँस लें: पंजों पर लुढ़कें और छाती को ऊर्ध्व मुख श्वानासन (या नीची कोबरा) में उठाएँ।
  7. साँस छोड़ें: पंजे मोड़ें और अधो मुख श्वानासन में पीछे दबाएँ। 5 साँस रोकें।
  8. साँस लें: आगे कदम या कूद, आधी उठान। साँस छोड़ें: झुकें। साँस लें: भुजाएँ सिर के ऊपर रखते हुए खड़े हों। साँस छोड़ें: हाथ हृदय पर।

सुझाई गई अवधि: 300 सेकंड · श्वास: Paced

सूर्य नमस्कार A आपके दोषों को कैसे प्रभावित करता है

आयुर्वेद में वही आसन आपकी प्रकृति के अनुसार अलग असर करता है। यही वह दृष्टिकोण है जिससे ऐप आपकी प्रैक्टिस क्रमबद्ध करता है।

हर दोष पर सूर्य नमस्कार A का प्रभाव
दोषप्रभावटिप्पणियाँ
Vata संतुलनकारी अच्छा मेल — इस दोष को शांत करने में मदद करता है
Pitta तटस्थ मोटे तौर पर तटस्थ
Kapha संतुलनकारी अच्छा मेल — इस दोष को शांत करने में मदद करता है

शरीर केंद्र: Full Body, Spine, Core, Legs, Shoulders, Chest

इस आसन को किसे टालना या बदलना चाहिए

  • गर्भवती महिलाओं को पेट-के-बल चरण (चतुरंग, ऊर्ध्व मुख श्वान) छोड़ देने चाहिए — घुटना-छाती-ठोड़ी और कोबरा से बदलें
  • गंभीर कलाई की चोट में अभ्यास न करें — चतुरंग को संशोधित करें या छोड़ें
  • स्लिप डिस्क, गंभीर निचली पीठ की चोट या हाल की पेट की सर्जरी में छोड़ दें
  • उच्च रक्तचाप या हाल की हृदय घटना में इससे बचें — बहुत हृदय-संवहनी
  • भरे पेट अभ्यास न करें — खाने के बाद 2-3 घंटे रुकें

यदि आप गर्भवती हैं, चोटिल हैं, या किसी स्थिति का प्रबंधन कर रहे हैं, तो अभ्यास से पहले किसी योग्य शिक्षक या चिकित्सक से परामर्श करें।

बदलाव

  • नए अभ्यासियों के लिए चतुरंग के बजाय घुटना-छाती-ठोड़ी — घुटने नीचे, फिर छाती, फिर ठोड़ी ज़मीन पर
  • ऊर्ध्व मुख श्वान के बजाय कोबरा — कूल्हे ज़मीन पर रखता है
  • पीछे और आगे कदम रखें (कूदें नहीं)
  • पूरी श्रृंखला को शुरुआती सूर्य नमस्कार से बदलें: ताड़ासन → उत्तानासन → तख़्ती → अधो मुख श्वान → तख़्ती → उत्तानासन → ताड़ासन

पारंपरिक स्रोत: Modern hatha — आधुनिक हठ श्रृंखला। बहता-विन्यास रूप कृष्णमाचार्य द्वारा 20वीं सदी की मैसूर परंपरा में संहिताबद्ध किया गया। भक्तिपूर्ण सूर्य-नमस्कार अनुष्ठान आधुनिक आसन श्रृंखला से पहले के हैं।

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